धातु और द्रव्य शुद्धि परिचय
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भाव शुद्धि और द्रव्य शुद्धि का क्या संबंध है?
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संक्षिप्त उत्तर
भाव शुद्धि और द्रव्य शुद्धि परस्पर आश्रित हैं — शुद्ध धातु का सात्विक स्पंदन भावों को उन्नत करता है और शुद्ध भाव वाला शास्त्र-सम्मत द्रव्य चुनता है। दोनों का संयोग दैवीय कृपा अनिवार्य बनाता है।
यह समझना आवश्यक है कि द्रव्य शुद्धि (पदार्थ की पवित्रता) और भाव शुद्धि (आंतरिक निष्ठा) एक-दूसरे से पृथक नहीं, अपितु परस्पर आश्रित हैं।
जब कोई साधक ईश्वर की आराधना के लिए स्वर्ण जैसी दिव्य उत्पत्ति वाली धातु का प्रयोग करता है, तो उस धातु का सात्विक स्पंदन स्वतः ही साधक के भावों को उन्नत और निर्मल करता है।
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