भीष्म की मृत्यु किसी दिव्यास्त्र से नहीं — अर्जुन के बाणों से हुई। शिखंडी को सामने कर अर्जुन ने बाण चलाए। इच्छामृत्यु के कारण 58 दिन शरशय्या पर रहने के बाद उत्तरायण में प्राण त्यागे।
भीष्म पितामह की मृत्यु किसी एक दिव्यास्त्र से नहीं, बल्कि अर्जुन के साधारण बाणों की अनवरत वर्षा से हुई — और यह भी उनकी इच्छामृत्यु थी।
कथा इस प्रकार है — भीष्म की प्रतिज्ञा थी कि वे किसी स्त्री या नपुंसक व्यक्ति पर शस्त्र नहीं उठाएंगे।