भीष्म पितामह को उनके पिता शांतनु से इच्छामृत्यु का वरदान था इसलिए बाणों की शैया पर 58 दिन पड़े रहने पर भी वे जीवित रहे। वे उत्तरायण की प्रतीक्षा में थे क्योंकि शास्त्रों में उत्तरायण में मृत्यु को मोक
भीष्म पितामह कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन अर्जुन के बाणों से छलनी हो गए और बाणों की शैया पर गिर पड़े, परंतु उनकी मृत्यु नहीं हुई।
इसके पीछे उन्हें प्राप्त 'इच्छामृत्यु' का वरदान था। यह वरदान उन्हें उनके पिता राजा शांतनु ने दिया था।