नित्य मंत्र
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भोजन के बाद कौन सा मंत्र बोलें?
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संक्षिप्त उत्तर
भोजन पूर्व: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः...' (गीता 4.24) + पंचप्राण आहुति। भोजन बाद: 'अन्नदाता सुखी भव' + 'ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा' (जल सहित) + आचमन। पूर्व/उत्तर मुख, मौन भोजन श्रेष्ठ।
हिन्दू धर्म में भोजन से पूर्व और बाद दोनों समय मंत्रोच्चार का विधान है। भोजन से पूर्व: 'ॐ अन्नपते अन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः।
प्र प्र दातारं तारिष ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे। ' या सरल मंत्र: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्।
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