'भूप सहस दस एकहिं बारा। लगे उठावन टरइ न टारा' — इसका अर्थ?
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संक्षिप्त उत्तर
अर्थ — दस हज़ार राजा एक साथ उठाने लगे पर धनुष टस-से-मस नहीं हुआ। शिवजी का धनुष इतना भारी और दिव्य कि कोई हिला तक नहीं सका। इसके बाद जनक ने निराश वाणी कही।
इस चौपाई का अर्थ — दस हज़ार राजा एक साथ मिलकर (शिवजी के धनुष को) उठाने लगे, पर वह टस-से-मस नहीं हुआ (टरइ न टारा = हिला नहीं, टला नहीं)।
यह दृश्य धनुष-यज्ञ की सभा का है जहाँ अनेक बलवान राजा आये थे।