भुवनेश्वरी माता का मुख्य मंत्र है — 'ह्रीं भुवनेश्वरीयै ह्रीं नमः'। 'ह्रीं' उनका बीजाक्षर है जिसे माया-बीज कहते हैं। वे दस महाविद्याओं में पाँचवीं, मूल प्रकृति का स्वरूप और आदिशक्ति हैं। उनकी आराधना स
भुवनेश्वरी दस महाविद्याओं में पाँचवें स्थान पर हैं।
देवीपुराण के अनुसार भुवनेश्वरी ही मूल प्रकृति हैं — इसीलिए उन्हें आदिशक्ति भी कहा जाता है।