शास्त्र कहते हैं: बिना धर्म और सत्कर्म के लक्ष्मी का स्थायित्व असंभव है। धर्म (विष्णु) के बिना धन आसुरी संपत्ति बन जाता है और अंततः मनुष्य के पतन का कारण बनता है।
इसी कारण से शास्त्रों में कहा गया है कि बिना धर्म और सत्कर्म के लक्ष्मी का स्थायित्व सर्वथा असंभव है।
मनुष्य के जीवन में धन या ऐश्वर्य का आगमन उसके शुभ कर्मों का परिणाम है, और यदि वह कर्म दूषित हो जाए, तो साक्षिणी के रूप में लक्ष्मी तत्काल उस स्थान से विमुख हो जाती हैं।