अभिमंत्रण और प्राण प्रतिष्ठा
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बिना प्राण प्रतिष्ठा के रत्न धारण करने से क्या होता है?
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संक्षिप्त उत्तर
बिना शुद्धि और प्राण प्रतिष्ठा के रत्न धारण करना शास्त्र सम्मत नहीं — बिना इसके वह चैतन्य उपकरण नहीं, केवल एक सुंदर पत्थर ही रहता है।
एक रत्न को खान से निकालकर, तराशकर सीधे धारण कर लेना शास्त्र सम्मत नहीं है।
उसकी शुद्धि और प्राण-प्रतिष्ठा अनिवार्य है, जिसके बिना वह एक चैतन्य उपकरण के स्थान पर केवल एक सुंदर पत्थर ही रहता है।
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