तुलसीदासजी ने सत्संग की महिमा में क्या कहा — 'बिनु सत्संग विवेक न होई' का क्या अर्थ है?
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संक्षिप्त उत्तर
अर्थ — सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और राम की कृपा के बिना सत्संग सहज में नहीं मिलता। सत्संगति आनन्द और कल्याण की जड़ है — सत्संग की प्राप्ति ही फल है और बाकी सब साधन फूल हैं।
इस चौपाई का अर्थ है कि सत्संग (संतों की संगति) के बिना विवेक (सत्-असत् का भेद जानने की बुद्धि) नहीं होता।
पूरी चौपाई — 'बिनु सत्संग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई। सत्संगत मुद मंगल मूला।