ब्रह्मास्त्र मांत्रिक अस्त्र था — ब्रह्मा का ध्यान करके बाण को विशेष मंत्र से अभिमंत्रित करके छोड़ा जाता था। मन और आत्मा की शक्ति आवश्यक थी, शारीरिक बल नहीं। ज्ञान दुर्लभ था।
ब्रह्मास्त्र एक मांत्रिक दिव्यास्त्र था जिसे चलाने के लिए मन की शक्ति, मंत्र-ज्ञान और असाधारण आध्यात्मिक बल की आवश्यकता होती थी।
चलाने की विधि इस प्रकार थी — योद्धा को पहले भगवान ब्रह्मा का ध्यान और आह्वान करना होता था।