स्तोत्र एवं पाठ
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चालीसा पाठ में बैठने का सही तरीका
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संक्षिप्त उत्तर
आसन (कुशा/ऊन/सूती) पर, पूर्व/उत्तर मुख, सुखासन, रीढ़ सीधी, माला दाहिने हाथ। जमीन/बिस्तर/जूते=वर्जित। भाव > आसन।
चालीसा/स्तोत्र पाठ बैठने का सही तरीका: 1। आसन — कुशा/ऊन/रेशम/सूती चटाई/आसन। जमीन पर सीधे नहीं। दिशा — पूर्व या उत्तर मुख।
दक्षिण = पितृ कर्म। मुद्रा — सुखासन (आरामदायक पालथी) या पद्मासन। हाथ — माला हो तो दाहिने हाथ में; बिना माला = हाथ गोद/घुटने।
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