अर्धनारीश्वर स्तोत्र
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अर्धनारीश्वर स्तोत्र में चम्पेयगौर और कर्पूरगौर का क्या अर्थ है?
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संक्षिप्त उत्तर
चम्पेयगौर = देवी का चंपा पुष्प जैसा पीत-गौर वर्ण (भोग/सौंदर्य का प्रतीक); कर्पूरगौर = शिव का कपूर जैसा श्वेत वर्ण (वैराग्य/त्याग का प्रतीक)।
स्तोत्र के पहले श्लोक में 'चाम्पेयगौर' और 'कर्पूरगौर' का प्रयोग हुआ है।
चाम्पेयगौर: जिनका आधा शरीर (देवी/शक्ति भाग) चंपा पुष्प के समान पीत-गौर वर्ण का है। यह आकर्षण और भोग का प्रतीक है।
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