रावण ने कैलाश उठाने के बाद शिव के पैर से दबने पर दर्द में शिव तांडव स्तोत्र रचा। प्रसन्न शिव ने चंद्रहास खड्ग, अजेयता और 'रावण' नाम दिया — साथ में चेतावनी कि दुरुपयोग पर तलवार वापस आ जाएगी।
रावण को चंद्रहास तलवार शिव की भक्ति से प्राप्त हुई। इसकी कथा शिव पुराण में वर्णित है।
कैसे मिली — रावण ने अपनी शक्ति के अहंकार में कैलाश पर्वत उठा लिया। शिव ने पैर के अंगूठे से कैलाश को दबाया जिससे रावण की अंगुलियाँ कुचल गईं।