चित्रगुप्त जीव के मनसा-वाचा-कर्मणा से किए सभी कर्म देखते हैं — प्रकट और गुप्त दोनों। पुण्य और पाप दोनों दर्ज होते हैं। जन्म से मृत्यु तक का एक भी कर्म उनसे छुपा नहीं रहता।
गरुड़ पुराण में चित्रगुप्त के लेखे की व्यापकता अत्यंत विस्तार से बताई गई है। वे जीव के जीवन का प्रत्येक कर्म देखते और लिखते हैं।
गुप्त कर्म — जो कर्म व्यक्ति ने अकेले में, छुपकर किए — चाहे चोरी हो, झूठ हो, छल हो — सब दर्ज होते हैं।