चित्रगुप्त जीव के पुण्यों को कैसे प्रमाणित करते हैं?
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संक्षिप्त उत्तर
चित्रगुप्त की पंजिका में पाप और पुण्य दोनों समान रूप से लिखे हैं। वे यमराज को तुलनात्मक लेखा देते हैं। गुप्त दान भी उनसे छुपा नहीं — हर पुण्यकर्म उतनी ही निश्चितता से दर्ज है।
गरुड़ पुराण और पुराणिक परंपरा में चित्रगुप्त द्वारा पुण्यों के प्रमाण की भी उतनी ही विश्वसनीय व्यवस्था है जितनी पापों के लिए।
सम्पूर्ण लेखा — चित्रगुप्त की पंजिका में केवल पाप नहीं, समस्त पुण्यकर्म भी लिखे हैं।