चित्रगुप्त के पास 'अग्रसंधानी' नामक दिव्य पंजिका है जिसमें प्रत्येक जीव के जन्म से मृत्यु तक के समस्त कर्म लिखे रहते हैं। कर्मों की 'फिल्म' भी होती है जो इनकार करने पर दिखाई जाती है।
पुराणों में चित्रगुप्त के पास कर्मों के लेखे की दिव्य व्यवस्था का उल्लेख मिलता है।
अग्रसंधानी पंजिका — ब्रह्मा जी ने चित्रगुप्त को 'अग्रसंधानी' नामक एक दिव्य पंजिका (बही-खाता) सौंपी है।