विस्तृत उत्तर
पुराणों में चित्रगुप्त के पास कर्मों के लेखे की दिव्य व्यवस्था का उल्लेख मिलता है।
अग्रसंधानी पंजिका — ब्रह्मा जी ने चित्रगुप्त को 'अग्रसंधानी' नामक एक दिव्य पंजिका (बही-खाता) सौंपी है। इसमें सृष्टि के प्रत्येक जीव के समस्त कर्म लिखे रहते हैं। यह पंजिका अक्षय है — कभी भरती नहीं, कभी नष्ट नहीं होती।
कलम और दवात — चित्रगुप्त की मूर्ति और चित्र में उनके हाथ में सदा कलम और दवात दिखाए जाते हैं। यह उनके कर्म-लेखन के कार्य का प्रतीक है। कायस्थ समुदाय इसीलिए भाई दूज पर कलम-दवात की पूजा करता है।
कर्मों की 'फिल्म' — कुछ ग्रंथों में वर्णन है कि चित्रगुप्त के पास जीव के जीवन के सभी कर्मों का एक चलचित्र (दृश्य-रिकॉर्ड) होता है। जब जीव इनकार करता है, यह फिल्म चला दी जाती है।
निरंतर अद्यतन — जीव जो भी कर्म करता जाता है, वह तत्काल लेखे में दर्ज होता जाता है। यह कोई एकबारगी प्रक्रिया नहीं — यह सतत और सर्वव्यापी है।
इस व्यवस्था का संदेश है — ईश्वर की दृष्टि से कोई भी कर्म छुपा नहीं रहता।





