गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय के अनुसार चित्रगुप्त पापियों को सुनाते हैं — 'तुम्हारे पाप ही तुम्हारे दुःख के कारण हैं, हम नहीं।' साथ ही यमदूत पूछते हैं कि दान, तीर्थ, देव-पूजन और हरिनाम जप क्यों नहीं कि
गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में यमलोक के न्यायालय का विस्तृत वर्णन है।
जब पापी आत्मा यमपुर पहुँचती है, तो धर्मराज के द्वारपाल धर्मध्वज उस जीव का परिचय चित्रगुप्त को देते हैं।