चन्द्र ग्रहण: सूतक ~9 घंटे पूर्व। भोजन पर कुश+तुलसी। स्नान → कुश आसन → गायत्री/सोम मंत्र/महामृत्युंजय जप → ध्यान। मोक्ष बाद: स्नान → पूजा → दान → ब्राह्मण भोजन। भोजन/शयन वर्जित (ग्रहण काल)। जप = लाख ग
चन्द्र ग्रहण (पूर्णिमा को) में विशेष पूजा-जप विधान है। ग्रहण पूर्व: - सूतक काल (ग्रहण से ~9 घंटे पूर्व) आरम्भ — भोजन बनाना/खाना बन्द।
- पके भोजन, दूध, जल पर कुश + तुलसी रखें। - गर्भवती स्त्रियाँ विशेष सावधानी रखें (परम्परागत मान्यता)। ग्रहण काल में: 1।