जीवन एवं मृत्यु
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दान का फल कैसे बढ़ता है?
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संक्षिप्त उत्तर
दान का फल बढ़ता है — पुण्यकाल (ग्रहण, संक्रांति, पितृपक्ष) में, तीर्थ में (एक गाय = एक लाख का फल), मृत्युकाल में (हजारगुना), सत्पात्र को और श्रद्धापूर्वक देने से।
गरुड़ पुराण में दान के फल को बढ़ाने वाले कारकों का विस्तृत वर्णन है।
पुण्यकाल में दान — गरुड़ पुराण के बारहवें अध्याय में — 'कार्तिक आदि शुभ महीनों में, सूर्य के उत्तरायण होने पर, शुक्लपक्ष की तिथियों में, सूर्य-चन्द्र के ग्रहणकाल में, पवित्र तीर्थ में' दिया गया दान वि
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