दान का फल मिलने के तरीके — यममार्ग पर दान 'आगे-आगे उपस्थित होता है', कर्म के रूप में जीव के साथ जाता है, सूक्ष्म रूप में पितरों तक पहुँचता है, तत्काल और अक्षय है। पुण्यकाल में गुणित होता है।
गरुड़ पुराण में दान के फल मिलने की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन है।
यममार्ग पर प्रत्यक्ष — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में — 'पृथ्वी पर मनुष्यों के द्वारा जो-जो दान दिये जाते हैं, यमलोक के मार्ग में वे सभी आगे-आगे उपस्थित हो जाते हैं।