दान का फल दाता को (पाप-नाश, स्वर्ग), प्रेत-पितरों को (तृप्ति-मुक्ति) और तीनों लोकों को मिलता है। 'भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्गलोक के निवासी सभी दान से संतुष्ट होते हैं।'
गरुड़ पुराण में दान के फल के विषय में अत्यंत स्पष्ट और व्यापक वर्णन है। दाता को — दान का प्राथमिक फल दाता (देने वाले) को मिलता है।
उसके पापों का नाश होता है, यमदूत प्रसन्न होते हैं, यममार्ग सुगम होता है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।