दान का संबंध तीनों लोकों से है — भूलोक में होता है, यमलोक में पाथेय बनता है (वैतरणी पार कराता है), स्वर्ग में देवगण प्रसन्न होते हैं और अंततः मोक्ष का मार्ग खुलता है।
गरुड़ पुराण में दान का संबंध तीनों लोकों से बताया गया है — यह एक ऐसा कर्म है जो सर्वलोकव्यापी प्रभाव रखता है।
भूलोक से संबंध — दान इस संसार में होता है। दाता मनुष्यलोक में दान करके कर्म का संग्रह करता है जो परलोक में फलता है।