विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान का संबंध तीनों लोकों से बताया गया है — यह एक ऐसा कर्म है जो सर्वलोकव्यापी प्रभाव रखता है।
भूलोक से संबंध — दान इस संसार में होता है। दाता मनुष्यलोक में दान करके कर्म का संग्रह करता है जो परलोक में फलता है। गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में — 'पृथ्वी पर मनुष्यों के द्वारा जो-जो दान दिये जाते हैं, यमलोक के मार्ग में वे सभी आगे-आगे उपस्थित हो जाते हैं।'
यमलोक से संबंध — दान यमलोक के मार्ग पर जीव की सहायता करता है। वैतरणी नदी दान से पार होती है। इसीलिए उसका नाम 'वैतरणी' है — 'वितरण (दान) से पार होने वाली।'
स्वर्गलोक से संबंध — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में — 'भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्गलोक के निवासी — मनुष्य, भूत-प्रेत तथा देवगण — दान से संतुष्ट होते हैं।' स्वर्ग में भी दान की महिमा है।
परमलोक (मोक्ष) से संबंध — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'दान के प्रभाव से वह जीव देवताओं से पूजित होकर स्वर्ग को प्राप्त करता है।' और आत्म-ज्ञान-सहित दान मोक्ष का द्वार खोलता है।





