लोकभूलोक को 'महा-रंगमंच' क्यों कहा गया है?भूलोक 'महा-रंगमंच' इसलिए है क्योंकि यहाँ अनगिनत जीवात्माएं अपने कर्मों का नाटक खेलती हैं। देवता भी यहाँ जन्म चाहते हैं क्योंकि केवल यहीं मोक्ष का मार्ग है।#भूलोक#महा रंगमंच#जीवात्मा
लोकभूलोक को ब्रह्मांड का केंद्र बिंदु क्यों कहते हैं?भूलोक ब्रह्मांड का केंद्र बिंदु है क्योंकि सभी लोकों की यात्रा के बाद जीव यहीं लौटता है, यहीं से मोक्ष मिलता है और यहीं दुःख-सुख के मिश्रण से वैराग्य उत्पन्न होता है।#भूलोक
लोकगरुड़ पुराण के अनुसार भूलोक में किए कर्मों का परलोक से क्या संबंध है?गरुड़ पुराण के अनुसार भूलोक में किए गए कर्म ही परलोक की यात्रा तय करते हैं। पाप से नर्क, पुण्य से स्वर्ग। भोग के बाद पुनः भूलोक में जन्म होता है।#गरुड़ पुराण#भूलोक#कर्म
लोकविष्णु पुराण और भागवत पुराण में भूलोक के वर्णन में क्या अंतर है?विष्णु पुराण भारतवर्ष के आध्यात्मिक महत्व और मोक्ष पर बल देता है जबकि भागवत पुराण गणितीय माप, शासकों की वंशावली और प्रत्येक वर्ष के अधिष्ठाता देव का विस्तृत वर्णन करता है।#विष्णु पुराण#भागवत पुराण#भूलोक
लोकभूलोक का संबंध मृत्यु के बाद की यात्रा से क्या है?मृत्यु के बाद भूलोक में किए कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक मिलता है लेकिन वहाँ का भोग पूरा होने पर पुनः भूलोक में ही लौटना पड़ता है। यहीं जन्म-मरण का चक्र तोड़ा जा सकता है।#भूलोक#मृत्यु#परलोक
लोकगंगा नदी का भूलोक पर अवतरण कैसे हुआ?भगवान वामन के त्रिविक्रम स्वरूप के चरण के नाखून से ब्रह्मांड का आवरण टूटा और बाहर का कारण-जल भीतर आया। चरण-स्पर्श से वह 'विष्णुपदी गंगा' बनी।#गंगा#अवतरण#वामन अवतार
लोकजम्बूद्वीप क्या है और कहाँ है?जम्बूद्वीप सप्तद्वीपों के केंद्र में स्थित है। इसका विस्तार एक लाख योजन है और यह लवण सागर से घिरा है। इसके केंद्र में सुमेरु पर्वत है।#जम्बूद्वीप#भूलोक#लवण सागर
लोकसात महासागर कौन-कौन से हैं?सात महासागर हैं — लवण सागर (खारा जल), इक्षु सागर (गन्ने का रस), सुरा सागर (मदिरा), सर्पि सागर (घी), दधि सागर (दही), दुग्ध सागर (दूध) और जल सागर (मीठा जल)।#सात महासागर#लवण सागर#इक्षु सागर
लोकभूलोक में कितने द्वीप हैं और उनके नाम क्या हैं?भूलोक में सात द्वीप हैं — जम्बू, प्लक्ष, शाल्मलि, कुश, क्रौंच, शाक और पुष्कर। प्रत्येक द्वीप अपने पूर्ववर्ती से दोगुना बड़ा है।#सप्तद्वीप#जम्बू द्वीप#पुष्कर द्वीप
लोकभूलोक का विस्तार कितना है?भूलोक का विस्तार पचास करोड़ योजन (लगभग चार अरब मील) है। यह सात द्वीपों और सात महासागरों में विभक्त है जिनमें प्रत्येक द्वीप पूर्ववर्ती से दोगुना बड़ा है।#भूलोक#विस्तार#पचास करोड़ योजन
लोकभूलोक किस आकार का है?भूलोक का आकार एक विशाल खिले हुए कमल-पत्र के समान है। इसका विस्तार पचास करोड़ योजन (लगभग चार अरब मील) बताया गया है।#भूलोक#आकार#कमल पत्र
लोकभूलोक को कर्मभूमि क्यों कहते हैं?भूलोक को कर्मभूमि इसलिए कहते हैं क्योंकि केवल यहाँ नए कर्म करने की स्वतंत्रता है और केवल यहीं मोक्ष प्राप्त हो सकता है। अन्य सभी लोक केवल भोगभूमियाँ हैं।#भूलोक#कर्मभूमि#मोक्ष
लोकभूलोक के नीचे कौन-कौन से लोक हैं?भूलोक के नीचे सात अधोलोक हैं — अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। यहाँ सर्प-मणियों का प्रकाश है और असुर-नाग-दानव रहते हैं।#भूलोक#अधोलोक#पाताल
लोकभूलोक के ऊपर कौन-कौन से लोक हैं?भूलोक के ऊपर छह लोक हैं — भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक (ब्रह्मलोक)।#भूलोक#ऊर्ध्व लोक#स्वर्लोक
लोकभूलोक ब्रह्मांड के 14 लोकों में कहाँ है?भूलोक 14 लोकों में मध्य लोक है — यह ऊर्ध्व लोकों का प्रथम सोपान है। ऊपर 6 लोक और नीचे 7 अधोलोक हैं। भगवान शेषनाग इसे अपने फनों पर धारण करते हैं।#भूलोक#14 लोक#मध्य लोक
लोकभूलोक क्या है?भूलोक परब्रह्म की योगमाया द्वारा रचित कर्म, भोग और मोक्ष का क्षेत्र है। जहाँ तक सूर्य-चन्द्र का प्रकाश पहुँचे और प्राणी विचरण करें वह सब भूलोक है।#भूलोक#कर्मभूमि#वैदिक
लोकविष्णु पुराण में भुवर्लोक का क्षैतिज विस्तार कितना बताया गया है?विष्णु पुराण के अनुसार भुवर्लोक का क्षैतिज विस्तार बिल्कुल भूलोक (पृथ्वी) के ही समान है। दोनों का घेरा एक जैसा है।#विष्णु पुराण#भुवर्लोक#क्षैतिज विस्तार
लोककृतक त्रैलोक्य क्या होता है?भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक — ये तीनों मिलकर कृतक त्रैलोक्य कहलाते हैं। 'कृतक' अर्थात विनाशी — ये तीनों प्रलय के समय नष्ट हो जाते हैं।#कृतक त्रैलोक्य#भूलोक#भुवर्लोक
लोकसात ऊर्ध्व लोक कौन-कौन से हैं?सात ऊर्ध्व लोक हैं — भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपलोक और सत्यलोक (ब्रह्मलोक)।#सात ऊर्ध्व लोक#भूलोक#भुवर्लोक
लोकभुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच क्यों है?भुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच इसलिए है क्योंकि यह स्थूल भौतिक और दैवीय जगत के बीच पारगमन क्षेत्र है। यहाँ सूक्ष्म सत्ताएं निवास करती हैं जो न पूर्णतः भौतिक हैं न दैवीय।#भुवर्लोक#भूलोक#स्वर्लोक
लोकभुवर्लोक कहाँ स्थित है?भुवर्लोक पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपर से लेकर सूर्यमंडल के नीचे तक फैला है। पृथ्वी से सूर्यमंडल की दूरी एक लाख योजन है और इसी के बीच भुवर्लोक है।#भुवर्लोक#स्थान#भूलोक
लोककौन से लोक कृतक कहलाते हैं?भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक कृतक लोक कहलाते हैं।#कृतक लोक#भूलोक#भुवर्लोक
लोककृतक लोक क्या होते हैं?कृतक लोक वे भौतिक लोक हैं जो नैमित्तिक प्रलय में जलकर नष्ट हो जाते हैं।#कृतक लोक#प्रलय#भूलोक
जीवन एवं मृत्युदान का संबंध किस लोक से है?दान का संबंध तीनों लोकों से है — भूलोक में होता है, यमलोक में पाथेय बनता है (वैतरणी पार कराता है), स्वर्ग में देवगण प्रसन्न होते हैं और अंततः मोक्ष का मार्ग खुलता है।#दान#तीनों लोक#भूलोक