विस्तृत उत्तर
ब्रह्माण्ड रूपी अण्ड की लंबवत संरचना में कुल चौदह भुवनों (लोकों) का उल्लेख प्राप्त होता है जिन्हें मुख्य रूप से तीन भागों — ऊर्ध्व लोक, मध्य लोक और अधोलोक — में विभाजित किया गया है। इसी त्रि-स्तरीय ब्रह्माण्डीय व्यवस्था में भूलोक 'मध्य लोक' के अंतर्गत आता है और यह ऊर्ध्व लोकों की शृंखला का सबसे निचला या प्रथम सोपान है। ब्रह्माण्ड के इस अण्डकार स्वरूप में भूलोक के ऊपर छह ऊर्ध्व लोक — भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक — स्थित हैं। इसके नीचे सात अधोलोक — अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल — विद्यमान हैं। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का यह विशाल भार और इन चौदह लोकों की मध्यवर्ती धुरी के रूप में भूलोक को भगवान शेषनाग (अनन्त देव) अपने फनों पर धारण करते हैं।
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