विस्तृत उत्तर
भूलोक के नीचे सात अधोलोक विद्यमान हैं। ये सात अधोलोक क्रमशः अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल हैं। ये सभी अधोलोक सूर्य के प्रकाश से वंचित हैं किन्तु वहाँ सर्पों के मणियों का अलौकिक प्रकाश रहता है। वहाँ असुर, नाग एवं दानव भौतिक ऐश्वर्य का भोग करते हैं जो स्वर्ग के समान ही है इसीलिए उसे 'बिल-स्वर्ग' (Subterranean Heaven) कहा जाता है। तथापि वहाँ आध्यात्मिक उन्नति या आत्म-साक्षात्कार का कोई मार्ग नहीं है क्योंकि वे विशुद्ध रूप से भौतिक भोग के लोक हैं जहाँ जीव अहंकार और माया में डूबे रहते हैं।
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