विस्तृत उत्तर
ब्रह्माण्ड के इस अण्डकार स्वरूप में भूलोक के ऊपर छह ऊर्ध्व लोक स्थित हैं। ये छह लोक क्रमशः इस प्रकार हैं — पहला भुवर्लोक (अंतरिक्ष), दूसरा स्वर्लोक (स्वर्ग जो देवराज इन्द्र और अन्य देवताओं का निवास है), तीसरा महर्लोक, चौथा जनलोक, पाँचवाँ तपोलोक और छठा सत्यलोक जिसे ब्रह्मलोक भी कहते हैं। सूर्य और ध्रुव के मध्य का चौदह लाख योजन का क्षेत्र स्वर्लोक है। इसके ऊपर क्रमशः महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक (ब्रह्मलोक) हैं जो तपस्वियों, ऋषियों और ब्रह्मा जी के निवास स्थान हैं। भूलोक से लेकर ध्रुवलोक के बीच के अंतरिक्ष को 'भुवर्लोक' (अन्तरिक्ष लोक) कहा जाता है जहाँ सिद्ध, मुनि और चारण विचरण करते हैं।
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