विस्तृत उत्तर
भूलोक को ब्रह्माण्ड का केंद्र बिंदु (Pivot) कहने के पीछे अनेक तात्विक और भौगोलिक कारण हैं। भौगोलिक दृष्टि से यह ऊर्ध्व लोकों और अधोलोकों के बिल्कुल मध्य में स्थित है। इसके ऊपर छह ऊर्ध्व लोक और नीचे सात अधोलोक हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से भूलोक ब्रह्माण्ड का वह केंद्र बिंदु है जहाँ आत्माएँ अपने अज्ञान (अविद्या) और जन्म-मरण (भव-रोग) के चक्र को तोड़ने का सचेतन प्रयास करती हैं। भगवद्गीता और पुराणों का स्पष्ट मत है कि स्वर्ग हो या पाताल जीव को अपने पुण्यों या पापों को भोगने के पश्चात् पुनः इसी भूलोक में आना पड़ता है। इस प्रकार भूलोक सभी लोकों का अंतिम गंतव्य है जहाँ बार-बार लौटना पड़ता है। यहाँ का दुःख-सुख का संतुलित मिश्रण ही वैराग्य को जन्म देता है और यही वैराग्य मोक्ष का प्रवेश-द्वार है। इसीलिए यह ब्रह्माण्ड का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और केंद्रीय लोक है।
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