दान का संबंध — कर्म से (सर्वोत्तम कर्म है), धर्म से (चार स्तंभों में एक), वैतरणी से (उसका नाम 'वितरण' से बना है), प्रेत-मुक्ति से और परमात्मा की कृपा से। दान सनातन धर्म का सार है।
गरुड़ पुराण में दान के संबंध को कई दृष्टियों से समझाया गया है।
दान का संबंध केवल भौतिक देने-लेने से नहीं है — यह एक व्यापक कर्म-चक्र का अंग है। दान और कर्म का संबंध — दान सर्वोत्तम कर्म है।