विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान के संबंध को कई दृष्टियों से समझाया गया है। दान का संबंध केवल भौतिक देने-लेने से नहीं है — यह एक व्यापक कर्म-चक्र का अंग है।
दान और कर्म का संबंध — दान सर्वोत्तम कर्म है। 'मृत्यु के बाद केवल कर्म साथ जाते हैं' — और दान उस कर्म का सर्वश्रेष्ठ रूप है। जो दिया जाता है वह लौटकर आता है — यही कर्म का नियम है।
दान और धर्म का संबंध — दान धर्म के चार स्तंभों में से एक है। गरुड़ पुराण में 'यज्ञ, दान, तप और तीर्थ' — इन्हें एक साथ बताया गया है। दान के बिना धर्म अपूर्ण है।
दान और वैतरणी का संबंध — वैतरणी नदी का नाम ही 'वितरण' (दान) से बना है — 'दान रूपी पुण्य से इस नदी को पार किया जाता है।' दान और मृत्यु के बाद की यात्रा का सीधा संबंध है।
दान और प्रेत-मुक्ति का संबंध — गरुड़ पुराण में दान को प्रेत-उद्धार का सबसे प्रभावी साधन बताया गया है।
दान और परमात्मा का संबंध — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'दान के प्रभाव से वह जीव देवताओं से पूजित होकर स्वर्ग को प्राप्त करता है।' दान ईश्वर की कृपा का द्वार है।





