भक्ति एवं आध्यात्म
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दान कर रहे हैं पर दरिद्रता दूर नहीं हो रही — कारण क्या है?
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संक्षिप्त उत्तर
दान का फल तब अधिक होता है जब — बिना दिखावे के सही पात्र को, सात्विक भाव से दिया जाए (गीता 17.20)। प्रारब्ध कर्म का ऋण चुकाने में समय लगता है। दान के साथ परिश्रम और अनुशासन भी जरूरी है।
दान की महिमा सभी शास्त्रों में है — 'दानात् मोक्षः', 'दान ही परम धर्म'। फिर भी दान के बावजूद दरिद्रता हो तो प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
दान के फल न मिलने के कारण: प्रारब्ध कर्म — यदि पिछले कर्मों में धन का दुरुपयोग, दूसरों का हक दबाना या कृपणता रही हो — तो वह ऋण चुकाने में समय लगता है।
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