गरुड़ पुराण में गोदान सर्वश्रेष्ठ दान है — वैतरणी पार कराता है, पाप नष्ट करता है, पितर-मोक्ष देता है। इसके बाद भूमिदान, स्वर्णदान और वृषोत्सर्ग आते हैं। 'गोदान जैसी कोई गति नहीं।'
गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में दानों की श्रेणी और उनके महत्व का विस्तृत वर्णन है।
इसमें स्पष्ट रूप से गोदान को सर्वश्रेष्ठ दान घोषित किया गया है।