रत्नों का दिव्य उद्गम
?
दैत्यराज बलि और रत्नों का क्या संबंध है?
PAURANIK.ORG
संक्षिप्त उत्तर
बलि ने वामन अवतार को तीसरे पग के लिए मस्तक अर्पित किया — भगवान के चरण स्पर्श से बलि का शरीर विभिन्न रत्नों में परिवर्तित होकर भू-मंडल पर बिखरा। प्रत्येक रत्न उनके सर्वोच्च त्याग का अंश है।
गरुड़ पुराण और श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित कथा के अनुसार, रत्नों का उद्गम परम भक्त दैत्यराज बलि के महायज्ञ से हुआ है।
जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार में बलि से तीन पग भूमि मांगी और दो पग में ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड नाप लिया, तब तीसरे पग के लिए बलि ने अपना मस्तक अर्पित कर दिया।
📖
सम्पूर्ण उत्तर पढ़ें
शास्त्रीय प्रमाण सहित विस्तृत उत्तर
पूरा उत्तर पढ़ें →
PAURANIK.ORG