दक्ष ब्रह्मसभा से शिवजी पर नाराज़ थे और यज्ञ में उनकी निन्दा की। सतीजी ने सभा को चेतावनी दी — जिन्होंने शिवनिन्दा की या सुनी, उन सबको तुरन्त फल मिलेगा और पिता दक्ष भी पछतायेंगे।
रामचरितमानस में दक्ष की शिवनिन्दा का विस्तृत वर्णन नहीं है, पर यह बताया गया है कि दक्ष पहले से ब्रह्मा की सभा में शिवजी से अप्रसन्न थे और तभी से उनका अपमान करते रहते थे।
शिवजी ने सतीजी को बताया था — 'ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना।