विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस में दक्ष की शिवनिन्दा का विस्तृत वर्णन नहीं है, पर यह बताया गया है कि दक्ष पहले से ब्रह्मा की सभा में शिवजी से अप्रसन्न थे और तभी से उनका अपमान करते रहते थे।
शिवजी ने सतीजी को बताया था — 'ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना। तेहि तें अजहुँ करहिं अपमाना॥' अर्थ — एक बार ब्रह्माकी सभामें दक्ष हमसे अप्रसन्न हो गये थे, उसीसे वे अब भी हमारा अपमान करते हैं।
सतीजी ने यज्ञस्थल पर शिवजी की निन्दा सुनी और सभा से कहा — 'सुनहु सभासद सकल मुनिंदा। कही सुनी जिन्ह संकर निंदा। सो फलु तुरत लहब सब काहूँ। भली भाँति पछिताब पिताहूँ॥'
अर्थ — हे सभासदो और सब मुनीश्वरो! सुनो। जिन लोगोंने यहाँ शिवजीकी निन्दा की या सुनी है, उन सबको उसका फल तुरंत ही मिलेगा और मेरे पिता दक्ष भी भलीभाँति पछतायेंगे।





