दक्ष ने सतीजी का कोई आदर नहीं किया और सभा में शिवजी की खुलकर निन्दा की। यज्ञ में शिवजी का कोई भाग नहीं रखा गया। सतीजी से यह अपमान सहा नहीं गया और उन्होंने क्रोध में सभा को डाँटा।
सतीजी जब पिता दक्ष के यज्ञ में पहुँचीं तो उनकी माता ने तो प्रेम से मिलीं, किन्तु दक्ष ने उन्हें देखकर भी कोई आदर नहीं किया।
इतना ही नहीं, दक्ष ने पूरी सभा में शिवजी की निन्दा की। सतीजी ने देखा कि यज्ञ में शिवजी का कोई भाग नहीं रखा गया।