शिव रूप
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दक्षिणामूर्ति शिव की उपासना का क्या महत्व है?
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संक्षिप्त उत्तर
दक्षिणामूर्ति = शिव का परम गुरु स्वरूप। दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (यजुर्वेद): 24 अक्षर मंत्र। शंकराचार्य स्तोत्र: अद्वैत सार, 'मोक्ष शास्त्र'। मौन गुरु — वृद्ध शिष्यों के संशय छिन्न। गुरु न मिले तो इन्हें
दक्षिणामूर्ति भगवान शिव का 'परम गुरु' स्वरूप है — ज्ञान, योग, संगीत और शास्त्रों के आदि शिक्षक।
'दक्षिणामूर्ति' नाम इसलिए कि वे दक्षिण (दक्षिण दिशा) की ओर मुख करके ऋषियों को ज्ञान देते हैं।
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