दंडवत प्रणाम में कमर से झुककर पेट के बल लेटें जिससे ठोड़ी, छाती, दोनों हाथ, दोनों घुटने और पाँव जमीन से स्पर्श करें। पेट जमीन से न लगे। इस मुद्रा में भगवान को समर्पण भाव से प्रणाम करें।
दंडवत प्रणाम को साष्टांग प्रणाम या अष्टांग नमस्कार भी कहा जाता है।
यह हिंदू धर्म में सर्वोत्तम प्रणाम माना जाता है क्योंकि इसमें शरीर के आठ अंगों से भगवान के समक्ष पूर्ण समर्पण व्यक्त होता है।