काली (क्रीं), तारा (स्त्रीं), त्रिपुर सुंदरी व भुवनेश्वरी (ह्रीं), छिन्नमस्ता (हूँ), भैरवी (ह्स्रौं), धूमावती (धूं), बगलामुखी (ह्लीं), मातंगी (ऐं) और कमला (श्रीं) दस महाविद्याओं के मूल बीज मंत्र हैं।
सनातन तंत्र शास्त्र में माता पार्वती (सती) के 10 भयंकर और रहस्यमयी स्वरूपों को 'दस महाविद्या' कहा जाता है।
प्रत्येक महाविद्या का अपना एक विशिष्ट बीज (Sonic energy) होता है जो उस देवी की संपूर्ण शक्तियों का केंद्र है।