दशमहाविद्या = परमशक्ति के दस रूप (देवीभागवत)। क्रम: काली (क्रीं), तारा (त्रीं), त्रिपुरसुंदरी (षोडशी), भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी (ह्लीं), मातंगी, कमला (श्रीं)। एक की सिद्धि = शे
दशमहाविद्या — शक्ति तंत्र की दस महाशक्तियों की सम्पूर्ण व्यवस्था: दशमहाविद्या की उत्पत्ति (देवीभागवत 7वाँ स्कंध): जब शिव दक्ष-यज्ञ में जाने की अनुमति सती को नहीं दे रहे थे — सती ने दस दिशाओं में दस र
शिव को दसों दिशाओं में दस अलग-अलग भयंकर देवियाँ दिखीं — यही दशमहाविद्याएं हैं।