दशगात्र और प्रेत का संबंध — दशगात्र के पिंड प्रेत का नया शरीर बनाते हैं, उसका भोजन हैं और यमयात्रा की शक्ति देते हैं। बिना दशगात्र के प्रेत शरीरहीन और असहाय रहता है।
गरुड़ पुराण में दशगात्र और प्रेत का संबंध शरीर-निर्माण और यात्रा-सक्षमता के स्तर पर है।
दशगात्र = प्रेत का नया शरीर — गरुड़ पुराण का मूल कथन है — 'दग्धे देहे पुनर्देहः पिण्डैरुत्पद्यते' — दाह-संस्कार में जले शरीर के बाद दशगात्र के पिंडों से ही प्रेत का नया सूक्ष्म शरीर बनता है।