रामचरितमानस — बालकाण्ड
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दशरथ की बारात कैसी थी — जनकपुर कैसे पहुँची?
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संक्षिप्त उत्तर
अत्यन्त भव्य बारात — वसिष्ठजी, मुनि, ब्राह्मण, सेना, हाथी-घोड़े-रथ सजे-धजे। नगाड़े-मंगलगान। शिवजी ने देवताओं को समझाया, नन्दी आगे बढ़ाया। दशरथ प्रसन्न-पुलकित। शिवजी रामरूप देख-देख सजल नेत्र हुए।
दशरथ की बारात अत्यन्त भव्य और शोभायमान थी। अयोध्या से जनकपुर तक बारात ने भव्य यात्रा की।
बारात में दशरथ के साथ गुरु वसिष्ठजी, अनेक मुनि, ब्राह्मण, सामन्त, सेना और सम्पूर्ण परिवार था। हाथी, घोड़े, रथ, पालकियाँ — सब सजे-धजे थे।
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