श्राद्ध एवं पितृ कर्म
?
दसवां कर्म कैसे करें विधि क्या है
PAURANIK.ORG
संक्षिप्त उत्तर
दसवां: स्नान → दशगात्र पिंडदान (प्रेत शरीर 10 अंग — गरुड़ पुराण) → तिल-जल → दान (वस्त्र/अन्न) → ब्राह्मण भोज → मुंडन (कुछ परंपरा)। 11वें: एकोद्दिष्ट; 12वें: सपिंडीकरण; 13वें: शुद्धि। कुल पुरोहित अनिवा
दसवां (दशाह) = मृत्यु के 10वें दिन का कर्म — सूतक/अशौच में महत्वपूर्ण पड़ाव। विधि (सामान्य): 1। स्नान — सभी परिजन।
दशगात्र पिंडदान — 10 दिन, 10 पिंड = प्रेत शरीर के 10 अंग निर्माण (गरुड़ पुराण)। 10वें दिन अंतिम पिंड। तिल-जल तर्पण — मृतक को तिल-जल अर्पित।
📖
सम्पूर्ण उत्तर पढ़ें
शास्त्रीय प्रमाण सहित विस्तृत उत्तर
पूरा उत्तर पढ़ें →
PAURANIK.ORG