दीप जलाते समय 'दीपज्योतिः परं ज्योतिः दीपज्योतिर्जनार्दनः' और 'शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा' — ये दो मंत्र पढ़े जाते हैं। पहला दीप को परब्रह्म मानकर नमन करता है, दूसरा शुभ, कल्याण और शत्रुनाश
दीप प्रज्वलन सनातन धर्म में प्रत्येक शुभ कार्य, पूजा और समारोह के आरम्भ में किया जाता है।
दीपक की लौ ज्ञान, पवित्रता और परब्रह्म के तेज का प्रतीक मानी गई है।