दीपदान से यममार्ग के अंधकार में प्रकाश मिलता है। दशगात्र में प्रतिदिन दीप का प्रावधान है। सांयकाल घट पर दीप प्रेत का मार्गदर्शक है। श्राद्ध में जलाया दीप पितर-पथ को प्रकाशित करता है।
गरुड़ पुराण में दीपदान का उल्लेख मृत्यु के बाद के अंधकारमय यममार्ग के संदर्भ में विशेष रूप से किया गया है।
यममार्ग में प्रकाश — गरुड़ पुराण में बताया गया है कि तामिस्त्र और अंधकारमय नरकों और यममार्ग के अंधेरे में जीव को दिशा-भ्रम होता है।