व्रत विधि
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देवशयनी एकादशी से देवउठनी तक शुभ कार्य क्यों नहीं करते?
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संक्षिप्त उत्तर
चातुर्मास: विष्णु निद्रा (दैवी कृपा अनुपलब्ध), वर्षा ऋतु (यात्रा कठिन), तप-साधना काल, जीव रक्षा (अहिंसा)। वर्जित: विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश। अनुमत: पूजा, व्रत, दान। देवउठनी = मुक्ति → विवाह आरम्भ।
देवशयनी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से देवउठनी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) = चातुर्मास (4 माह) = शुभ कार्य वर्जित: 1।
विष्णु निद्रा: भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। देवता सोये हुए = शुभ कार्यों में दैवी आशीर्वाद अनुपलब्ध।
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