देवी ग्रंथ
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देवी अर्गला स्तोत्र का पाठ किस उद्देश्य से करें?
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संक्षिप्त उत्तर
अर्गला = 'सांकल/ताला खोलने वाला' — देवी कृपा का द्वार खोले। प्रमुख प्रार्थना: 'रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि' — स्वास्थ्य, विजय, यश दो, शत्रु नाश करो। उद्देश्य: समृद्धि, शत्रु नाश, मनोकामना प
अर्गला स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का दूसरा अंग है (कवच के बाद)।
'अर्गला' का शाब्दिक अर्थ है 'सांकल' या 'ताला खोलने वाली' — अर्थात यह देवी कृपा का द्वार खोलने वाला स्तोत्र है। पाठ का उद्देश्य: 1।
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