देवी पूजा नियम
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देवी की पूजा में ब्राह्म मुहूर्त का क्या विशेष महत्व है?
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संक्षिप्त उत्तर
सात्विक ऊर्जा अधिकतम। सप्तशती, नवार्ण जप विशेष फलदायी। काली/भैरवी = रात्रि। संध्या भी शुभ। नियमितता प्रधान।
ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय ~96 मिनट पूर्व) देवी पूजा में: महत्व: सात्विक ऊर्जा सर्वाधिक, मन शांत, प्राणवायु शुद्ध — सभी देवताओं की पूजा हेतु सर्वोत्तम।
देवी विशेष: सप्तशती पाठ, नवार्ण मंत्र जप, कुंजिका स्तोत्र — ब्रह्ममुहूर्त में विशेष फलदायी।
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