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देवी पूजा नियम📜 योग शास्त्र, देवी पूजा पद्धति1 मिनट पठन

देवी की पूजा में ब्राह्म मुहूर्त का क्या विशेष महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

सात्विक ऊर्जा अधिकतम। सप्तशती, नवार्ण जप विशेष फलदायी। काली/भैरवी = रात्रि। संध्या भी शुभ। नियमितता प्रधान।

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विस्तृत उत्तर

ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय ~96 मिनट पूर्व) देवी पूजा में:

महत्व: सात्विक ऊर्जा सर्वाधिक, मन शांत, प्राणवायु शुद्ध — सभी देवताओं की पूजा हेतु सर्वोत्तम।

देवी विशेष: सप्तशती पाठ, नवार्ण मंत्र जप, कुंजिका स्तोत्र — ब्रह्ममुहूर्त में विशेष फलदायी। कुछ तांत्रिक साधनाएं रात्रि/मध्यरात्रि (काली/भैरवी)।

व्यावहारिक: ब्रह्ममुहूर्त न हो तो प्रातः/संध्या भी शुभ। नियमितता > विशिष्ट समय।

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शास्त्रीय स्रोत
योग शास्त्र, देवी पूजा पद्धति
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