विस्तृत उत्तर
ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय ~96 मिनट पूर्व) देवी पूजा में:
महत्व: सात्विक ऊर्जा सर्वाधिक, मन शांत, प्राणवायु शुद्ध — सभी देवताओं की पूजा हेतु सर्वोत्तम।
देवी विशेष: सप्तशती पाठ, नवार्ण मंत्र जप, कुंजिका स्तोत्र — ब्रह्ममुहूर्त में विशेष फलदायी। कुछ तांत्रिक साधनाएं रात्रि/मध्यरात्रि (काली/भैरवी)।
व्यावहारिक: ब्रह्ममुहूर्त न हो तो प्रातः/संध्या भी शुभ। नियमितता > विशिष्ट समय।





